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गणतंत्र दिवस पर भाषण 2027: 10 पंक्तियाँ, 2 और 5 मिनट का भाषण

SpeechesExamChowk Team·Updated: 12 September 2026·✅ Fact-checked against official sources

⚡ Quick facts

तिथि और दिन26 जनवरी 2027, मंगलवार — 78वाँ गणतंत्र दिवस
क्या हुआ थासंविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ (अंगीकृत 26 नवम्बर 1949 को हुआ था)
61 दिन का अंतर क्यों26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज की घोषणा हुई थी — उसी तिथि के सम्मान में रुके
ध्वज कौन फहराता हैराष्ट्रपति, कर्तव्य पथ पर (15 अगस्त को प्रधानमंत्री, लाल क़िले पर)
संविधान बनने में लगा समय2 साल 11 महीने 18 दिन · प्रारूप समिति अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर
प्रारम्भिक संविधान395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ — हाथ से लिखा गया, छपा नहीं
पहले राष्ट्रपतिडॉ. राजेन्द्र प्रसाद — शपथ 26 जनवरी 1950 को ही
2027 के मुख्य अतिथिअभी घोषणा नहीं हुई। भाषण में नाम मत डालिए जब तक आधिकारिक घोषणा न हो

गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है। 2027 में यह मंगलवार को पड़ रहा है और यह हमारा 78वाँ गणतंत्र दिवस होगा। इसी दिन 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ था और देश एक सम्पूर्ण गणराज्य बना था।

सबसे पहले वह गलती ठीक कर लेते हैं जो हर दूसरे भाषण में होती है: 15 अगस्त और 26 जनवरी एक ही चीज़ नहीं हैं। 15 अगस्त को हमें अंग्रेज़ों से आज़ादी मिली। 26 जनवरी को हमें अपना अपना कानून मिला। आज़ादी ने उन्हें बाहर भेजा; संविधान ने तय किया कि अब हम खुद को चलाएँगे कैसे। यही एक पंक्ति आपके भाषण को भीड़ से अलग कर देती है।

10 पंक्तियाँ — छोटी कक्षाओं (कक्षा 3–6) के लिए

  1. आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सभी शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों — आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
  2. आज 26 जनवरी है, हमारा गणतंत्र दिवस।
  3. इसी दिन 1950 में हमारा संविधान लागू हुआ था।
  4. इसी दिन से भारत एक गणराज्य बना।
  5. गणराज्य का अर्थ है — देश का मुखिया राजा नहीं, हमारा चुना हुआ होता है।
  6. संविधान बनाने वाली प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे डॉ. भीमराव अम्बेडकर।
  7. दिल्ली में कर्तव्य पथ पर बहुत सुंदर परेड होती है।
  8. उस परेड में हमारे राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं।
  9. यह दिन हमें सिखाता है कि देश के नियम हम सबके लिए बराबर हैं।
  10. इतना कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। धन्यवाद, जय हिन्द!
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2 मिनट का भाषण (कक्षा 6–10)

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों — आज गणतंत्र दिवस पर कुछ कहने का अवसर मिलने के लिए मैं आभारी हूँ।

26 जनवरी 1950। उस सुबह भारत का संविधान लागू हुआ और हम एक गणराज्य बन गए। 2027 में उस दिन को 78 साल हो रहे हैं।

पर एक प्रश्न पूछता हूँ: संविधान तो 26 नवम्बर 1949 को ही तैयार हो गया था। फिर उसे लागू करने में 61 दिन क्यों लगाए गए?

उत्तर बहुत सुंदर है। 26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने लाहौर में "पूर्ण स्वराज" की घोषणा की थी। उस दिन को याद रखने के लिए हमारे नेताओं ने जान-बूझकर प्रतीक्षा की, ताकि संविधान उसी तारीख़ को जीवित हो। यानी 26 जनवरी पहले एक वादा थी; 1950 में वह वादा पूरा हुआ।

और "गणराज्य" का अर्थ क्या है? अर्थ यह कि इस देश का सबसे बड़ा पद किसी ख़ानदान से नहीं आता। कोई भी बच्चा — किसी भी गाँव, किसी भी घर का — एक दिन राष्ट्रपति बन सकता है। अंग्रेज़ों के राज में हमारा मुखिया लंदन में बैठा एक राजा था। 26 जनवरी 1950 से हमारा मुखिया वह है जिसे हम चुनते हैं।

इसीलिए इस दिन राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर तिरंगा फहराते हैं — 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल क़िले पर फहराते हैं। यह अंतर भी कारण से है: 15 अगस्त 1947 को हमारे पास राष्ट्रपति का पद था ही नहीं। वह पद स्वयं संविधान से जन्मा। पहले राष्ट्रपति — डॉ. राजेन्द्र प्रसाद — ने उसी 26 जनवरी 1950 को शपथ ली थी।

तो आज केवल परेड देखकर घर मत जाइए। संविधान ने आपको कुछ अधिकार दिए हैं — समानता का, बोलने का, पढ़ने का। जो अपने अधिकार जानता है, वही गणतंत्र को ज़िंदा रखता है।

धन्यवाद। जय हिन्द!

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5 मिनट का भाषण (कक्षा 11–12, कॉलेज)

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे साथियों — 78वें गणतंत्र दिवस की आप सबको शुभकामनाएँ।

एक प्रश्न से शुरू करता हूँ। यदि आज़ादी 15 अगस्त 1947 को मिल गई थी, तो फिर 26 जनवरी का इतना महत्व क्यों? उत्तर सीधा है: 1947 में हमें देश मिला, और 1950 में हमें उस देश को चलाने का तरीक़ा मिला। बीच के उन ढाई वर्षों में भारत तकनीकी रूप से अब भी ब्रिटिश क्राउन का डोमिनियन था — हमारे सिर पर अब भी एक विदेशी राजा का नाम था। 26 जनवरी 1950 को वह नाम हटा, और उसकी जगह तीन शब्द आए: "हम भारत के लोग"।

वे 61 दिन। संविधान 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत हो चुका था। चाहते तो उसी दिन लागू कर देते। पर संविधान सभा ने दो महीने रुककर 26 जनवरी चुनी — क्योंकि 1929 के लाहौर अधिवेशन के बाद 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज की पहली घोषणा हुई थी, और उस दिन लोगों ने सड़कों पर शपथ ली थी कि पूर्ण स्वतंत्रता से कम कुछ स्वीकार नहीं। सोचिए: एक देश अपने सबसे बड़े दिन के लिए काम पूरा होने के बाद भी 61 दिन प्रतीक्षा करता है, केवल इसलिए कि एक पुरानी शपथ का सम्मान हो सके। यह तारीख़ संयोग नहीं है — यह चुनी हुई है।

काम कितना बड़ा था। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई, अध्यक्ष बने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद। प्रारूप समिति 29 अगस्त 1947 को बनी और उसके अध्यक्ष थे डॉ. भीमराव अम्बेडकर। पूरा काम 2 साल 11 महीने 18 दिन में हुआ। प्रारम्भिक संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं — उस समय विश्व का सबसे लम्बा लिखित संविधान। और यह छपा हुआ नहीं था: इसे हाथ से लिखा गया, प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा की सुलेख में, और पन्नों को शांतिनिकेतन के कलाकारों ने नंदलाल बोस के नेतृत्व में सजाया।

"गणराज्य" का ठीक अर्थ। लोकतंत्र और गणराज्य एक चीज़ नहीं हैं। ब्रिटेन आज भी लोकतंत्र है — वहाँ चुनाव होते हैं — पर वह गणराज्य नहीं है, क्योंकि उसका राष्ट्राध्यक्ष जन्म से राजा होता है। गणराज्य का अर्थ है: सबसे ऊँचा पद भी चुनाव से भरता है, रक्त से नहीं। इसीलिए प्रस्तावना में हम स्वयं को "सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य" कहते हैं। (एक रोचक बात: "समाजवादी" और "पंथनिरपेक्ष" शब्द शुरुआत में नहीं थे — वे 1976 के 42वें संशोधन में जोड़े गए।)

झंडे का वह अंतर जो लोग गलत बोलते हैं। 15 अगस्त को झंडा नीचे से ऊपर खींचा जाता है — इसे "ध्वजारोहण" कहते हैं, क्योंकि वह 1947 में एक नए देश के उठने का प्रतीक है, और इसे प्रधानमंत्री लाल क़िले पर करते हैं। 26 जनवरी को झंडा पहले से ही ऊपर बँधा होता है, केवल खोला जाता है — इसे "ध्वज फहराना" कहते हैं — क्योंकि देश तो पहले से स्वतंत्र है, और इसे राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर करते हैं। यदि आप यह एक विवरण सही बोल देते हैं, निर्णायक समझ जाते हैं कि आपने पढ़ा है।

अब सबसे ज़रूरी हिस्सा। 25 नवम्बर 1949 को, अंगीकार होने से ठीक एक दिन पहले, अम्बेडकर जी ने सभा में अपना अंतिम भाषण दिया। उसमें उन्होंने कहा था कि 26 जनवरी 1950 को हम एक राजनीतिक लोकतंत्र में प्रवेश कर रहे हैं, किन्तु सामाजिक लोकतंत्र अभी शेष है। उनके शब्दों में: राजनीति में हमें "एक व्यक्ति, एक मत, एक मूल्य" मिल जाएगा — पर समाज में? वहाँ मूल्य आज भी बराबर नहीं है।

उन्होंने इसे "विरोधाभासों का जीवन" कहा था। मतदान के द्वार पर हम बराबर हैं; उसके बाहर नहीं। और उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि हम इस विरोधाभास को शीघ्र दूर नहीं करते, तो जो लोग असमानता भुगत रहे हैं वे एक दिन उस ढाँचे को ही ध्वस्त कर देंगे जिसे हम इतने परिश्रम से बना रहे हैं।

तो 78 साल बाद हम कहाँ हैं? ईमानदारी से: कुछ में बहुत आगे, कुछ में अब भी रास्ते में। एक व्यक्ति एक मत — मिल गया, और मज़बूती से चल रहा है। पर जिसे अम्बेडकर जी ने सामाजिक लोकतंत्र कहा, उस पर काम अब भी चल रहा है। यह निराशा की बात नहीं है; यह काम की बात है। संविधान ने कभी यह नहीं कहा था कि काम समाप्त है — उसने कहा था कि औज़ार आपके हाथ में हैं।

और वे औज़ार आपके पास हैं। अनुच्छेद 32 — जिसे अम्बेडकर जी ने "संविधान की आत्मा और हृदय" कहा था — आपको सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है यदि आपका मौलिक अधिकार छीना जाए। विश्व के बहुत से देशों में एक साधारण विद्यार्थी के पास यह शक्ति नहीं है। परीक्षा में धाँधली हो, फ़ॉर्म बिना कारण अस्वीकार हो जाए, या किसी के साथ उसकी जाति या लिंग के कारण भेदभाव हो — यह रास्ता बंद नहीं होता।

अंत में। आज परेड होगी, मिठाई मिलेगी, छुट्टी होगी। पर एक छोटी-सी बात ले जाइए: अपने किसी एक अधिकार को ठीक से जान लीजिए — सूचना का अधिकार हो, शिक्षा का अधिकार हो, या समानता का अधिकार। 1950 में कुछ लोगों ने एक कमरे में बैठकर आपके लिए यह लिखा था, बिना आपको जाने। कम से कम इतना तो हम कर ही सकते हैं कि पढ़ लें कि उन्होंने हमारे लिए क्या लिखा।

धन्यवाद। जय हिन्द!

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भाषण में प्रयोग करने योग्य 5 उद्धरण

मंच पर बोलने के सुझाव

वे गलतियाँ जो भाषण में सबसे अधिक होती हैं

❓ Aksar poochhe jaane wale sawaal

गणतंत्र दिवस 2027 कब है और कौन-सा है?

26 जनवरी 2027, मंगलवार। यह हमारा 78वाँ गणतंत्र दिवस होगा — पहला गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया गया था, इसलिए 2027 वाला 78वाँ होता है।

गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस में क्या अंतर है?

15 अगस्त 1947 को हमें अंग्रेज़ों से आज़ादी मिली — उस दिन देश मिला। 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ — उस दिन देश को चलाने का तरीक़ा मिला। बीच के ढाई वर्षों में भारत तकनीकी रूप से ब्रिटिश क्राउन का डोमिनियन था और 1935 के अंग्रेज़ी क़ानून पर चल रहा था। एक और अंतर जो भाषण में काम आता है: 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल क़िले पर ध्वजारोहण करते हैं, 26 जनवरी को राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर ध्वज फहराते हैं।

संविधान 26 नवम्बर 1949 को तैयार था, तो 26 जनवरी को क्यों लागू किया?

जान-बूझकर 61 दिन प्रतीक्षा की गई। 1929 के लाहौर अधिवेशन के बाद 26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज' की पहली घोषणा की थी और उस दिन लोगों ने पूर्ण स्वतंत्रता की शपथ ली थी। उस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के लिए संविधान को उसी तिथि पर जीवित किया गया। भाषण में यह सबसे अच्छा हिस्सा होता है, क्योंकि बहुत कम लोग इसे जानते हैं।

गणतंत्र दिवस का भाषण कितना लम्बा होना चाहिए?

विद्यालय की प्रतियोगिता में प्रायः 2 से 3 मिनट मिलते हैं, और महाविद्यालय या वरिष्ठ वर्ग में 5 मिनट तक। इस पृष्ठ पर तीनों लम्बाई दी गई हैं: 10 पंक्तियाँ छोटी कक्षाओं के लिए, 2 मिनट कक्षा 6-10 के लिए और 5 मिनट कक्षा 11-12 तथा महाविद्यालय के लिए। समय से थोड़ा कम बोलना हमेशा बेहतर है।

26 जनवरी को ध्वजारोहण होता है या ध्वज फहराया जाता है?

26 जनवरी को ध्वज फहराया जाता है। झंडा पहले से ही खम्भे के ऊपर बँधा होता है और केवल खोला जाता है, क्योंकि देश पहले से स्वतंत्र है। 15 अगस्त को झंडा नीचे से ऊपर खींचा जाता है — ध्वजारोहण — जो 1947 में नए देश के उठने का प्रतीक है। यह छोटा-सा विवरण भाषण में बोलने पर निर्णायकों पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है।

2027 के गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि कौन होंगे?

अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। मुख्य अतिथि का नाम प्रायः समारोह से कुछ सप्ताह पहले ही घोषित होता है। इसलिए भाषण या निबंध में कोई नाम मत लिखिए जब तक सरकारी घोषणा न हो जाए — गलत नाम बोलना सबसे भारी गलती मानी जाती है।

भाषण में कौन-से उद्धरण प्रयोग करूँ?

डॉ. भीमराव अम्बेडकर के 25 नवम्बर 1949 वाले अंतिम भाषण से लिए गए उद्धरण सबसे प्रभावशाली हैं — विशेष रूप से 'विरोधाभासों का जीवन' वाला हिस्सा (राजनीति में समानता, समाज में असमानता) और 'अनुच्छेद 32 संविधान की आत्मा है'। इस पृष्ठ पर पाँच उद्धरण दिए गए हैं। एक या दो ही लीजिए — अधिक उद्धरण भाषण को किताबी बना देते हैं।

कर्तव्य पथ और राजपथ एक ही हैं?

हाँ, वही सड़क है। सितम्बर 2022 में राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया। गणतंत्र दिवस की मुख्य परेड वहीं होती है। यदि आप 2027 के भाषण में 'राजपथ' बोलते हैं तो वह पुराना नाम है — 'कर्तव्य पथ' बोलना सही रहेगा।