गणतंत्र दिवस पर निबंध विद्यालय में सबसे अधिक पूछा जाने वाला निबंध है — और सबसे अधिक रटा हुआ भी। यहाँ तीन अलग लम्बाई के निबंध दिए गए हैं (150, 300 और 500 शब्द), साथ में वे तथ्य जो आपके निबंध को बाक़ी सबसे अलग कर देंगे।
ज़रूरी तिथियाँ एक जगह: 26 जनवरी 2027, मंगलवार, हमारा 78वाँ गणतंत्र दिवस। संविधान 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत हुआ, 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। पूर्ण स्वराज की घोषणा 26 जनवरी 1930।
150 शब्दों का निबंध (कक्षा 4–7)
गणतंत्र दिवस हमारे देश का एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय पर्व है। यह हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन 1950 में हमारा संविधान लागू हुआ था और भारत एक गणराज्य बना था।
संविधान वह पुस्तक है जिसमें हमारे देश के नियम और हमारे अधिकार लिखे हैं। इसे बनाने वाली प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। इस कार्य में 2 साल 11 महीने 18 दिन लगे थे।
इस दिन दिल्ली में कर्तव्य पथ पर एक बड़ी परेड होती है। हमारे राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं। सेना के जवान मार्च करते हैं, अलग-अलग राज्यों की झाँकियाँ निकलती हैं और वीर बालकों को पुरस्कार दिए जाते हैं। विद्यालय में भी ध्वज फहराया जाता है और मिठाई बाँटी जाती है।
गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि हमारा देश हम सबका है। इसके नियम अमीर और ग़रीब, सबके लिए बराबर हैं। इसलिए यह दिन हम सबके लिए गर्व का दिन है।
300 शब्दों का निबंध (कक्षा 8–10)
प्रस्तावना। 26 जनवरी को मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस भारत के तीन राष्ट्रीय पर्वों में से एक है। 2027 में हम अपना 78वाँ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। इसी दिन 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ और देश एक सम्पूर्ण गणराज्य बना।
आज़ादी और गणतंत्र का अंतर। बहुत लोग समझते हैं कि 26 जनवरी को आज़ादी मिली थी। ऐसा नहीं है। आज़ादी 15 अगस्त 1947 को मिली। किन्तु उस समय भारत के पास अपना संविधान नहीं था — हम तब भी ब्रिटिश क्राउन के अधीन एक डोमिनियन थे। 26 जनवरी 1950 को वह स्थिति समाप्त हुई। आज़ादी ने अंग्रेज़ों को बाहर किया; संविधान ने तय किया कि अब हम स्वयं को चलाएँगे कैसे।
यही तिथि क्यों? संविधान तो 26 नवम्बर 1949 को तैयार हो चुका था। फिर भी उसे 61 दिन बाद लागू किया गया। इसका कारण यह है कि 26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने "पूर्ण स्वराज" की घोषणा की थी। उस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के लिए हमारे नेताओं ने जान-बूझकर 26 जनवरी चुनी। यानी यह तिथि संयोग नहीं, एक सोच-समझकर लिया गया निर्णय है।
संविधान कैसे बना। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई। प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। पूरा संविधान 2 साल 11 महीने 18 दिन में बना और इसे हाथ से लिखा गया था। आरम्भ में इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं।
आज कैसे मनाते हैं। दिल्ली में कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं, उसके बाद सेना की परेड, राज्यों की झाँकियाँ और वायु सेना का फ्लाई-पास्ट होता है। 29 जनवरी को "बीटिंग रिट्रीट" के साथ यह समारोह समाप्त होता है। विद्यालय और कार्यालय में भी ध्वज फहराया जाता है।
उपसंहार। गणतंत्र दिवस केवल परेड देखने का दिन नहीं है। यह याद दिलाने का दिन है कि इस देश में सबसे ऊँचा पद भी जन्म से नहीं, चुनाव से मिलता है — और यह कि संविधान ने हमें जो अधिकार दिए हैं, उन्हें जानना हमारी ज़िम्मेदारी है।
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500 शब्दों का निबंध (कक्षा 11–12, महाविद्यालय)
प्रस्तावना। भारत में तीन राष्ट्रीय पर्व मनाए जाते हैं — स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और गांधी जयंती। इनमें गणतंत्र दिवस सम्भवतः सबसे कम समझा गया दिन है। 15 अगस्त की कहानी सीधी है: हम ग़ुलाम थे, फिर स्वतंत्र हो गए। 26 जनवरी की कहानी उसके बाद शुरू होती है, और वह अधिक गहरी है। 2027 में हम अपना 78वाँ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं।
1947 से 1950 के बीच का रिक्त समय। 15 अगस्त 1947 को अंग्रेज़ चले गए, किन्तु भारत उस दिन पूरी तरह अपना स्वामी नहीं बना था। हम "डोमिनियन ऑफ़ इंडिया" थे — हमारे सिर पर अब भी ब्रिटिश क्राउन का नाम था और हम अब भी 1935 के गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट के ढाँचे पर चल रहे थे, अर्थात् उस क़ानून पर जिसे अंग्रेज़ों ने बनाया था। असली प्रश्न यह था: अब इस देश को चलाएगा कौन, और किस पुस्तक से? उस पुस्तक का नाम संविधान है, और वह 26 जनवरी 1950 को जीवित हुई।
तिथि का चयन। संविधान सभा ने संविधान 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत कर लिया था। चाहते तो उसी दिन लागू कर देते। पर उन्होंने 61 दिन प्रतीक्षा की, क्योंकि 1929 के लाहौर अधिवेशन के बाद 26 जनवरी 1930 को "पूर्ण स्वराज" की पहली घोषणा हुई थी और उस दिन लोगों ने पूर्ण स्वतंत्रता की शपथ ली थी। एक देश अपने सबसे बड़े दिन के लिए काम पूरा होने के बाद भी दो महीने रुकता है, केवल एक पुरानी प्रतिज्ञा का सम्मान करने के लिए — यह अपने आप में हमारे नेताओं की सोच के बारे में बहुत कुछ कहता है।
"गणराज्य" का अर्थ। लोकतंत्र और गणराज्य अलग चीज़ें हैं। ब्रिटेन लोकतंत्र है, पर गणराज्य नहीं — वहाँ राष्ट्राध्यक्ष जन्म से राजा होता है। गणराज्य का अर्थ है कि देश का सबसे ऊँचा पद भी चुनाव से भरता है। इसीलिए प्रस्तावना में हम स्वयं को "सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य" कहते हैं। ("समाजवादी" और "पंथनिरपेक्ष" शब्द 1976 के 42वें संशोधन में जोड़े गए थे।) पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को ही शपथ ली थी।
संविधान निर्माण। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई, अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद। प्रारूप समिति 29 अगस्त 1947 को बनी, अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर। कार्य 2 साल 11 महीने 18 दिन चला। प्रारम्भिक संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं — उस समय विश्व का सबसे लम्बा लिखित संविधान। इसे छापा नहीं गया था, बल्कि प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने हाथ से लिखा और नंदलाल बोस के नेतृत्व में शांतिनिकेतन के कलाकारों ने पन्ने सजाए।
समारोह। मुख्य समारोह दिल्ली में कर्तव्य पथ पर होता है (सितम्बर 2022 तक इसे राजपथ कहा जाता था)। राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं — 15 अगस्त से यह अलग है, जहाँ प्रधानमंत्री लाल क़िले पर फहराते हैं। यह अंतर इसलिए है क्योंकि 1947 में राष्ट्रपति का पद था ही नहीं; वह पद संविधान से जन्मा। परेड, झाँकियाँ, वीरता पुरस्कार और फ्लाई-पास्ट के बाद 29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट होती है।
एक अधूरा वादा। 25 नवम्बर 1949 को डॉ. अम्बेडकर ने संविधान सभा में कहा था कि हम एक "विरोधाभासों के जीवन" में प्रवेश कर रहे हैं: राजनीति में समानता होगी, पर सामाजिक और आर्थिक जीवन में असमानता। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इस विरोधाभास को जितनी शीघ्र हो सके दूर करना होगा। 78 वर्ष बाद राजनीतिक लोकतंत्र मज़बूती से चल रहा है; सामाजिक लोकतंत्र पर कार्य अभी शेष है।
उपसंहार। गणतंत्र दिवस केवल इतिहास का दिन नहीं, एक ज़िम्मेदारी का दिन है। अनुच्छेद 32, जिसे अम्बेडकर जी ने "संविधान की आत्मा" कहा, प्रत्येक नागरिक को सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। वह अधिकार तभी काम करता है जब लोग उसे जानते हैं। इसलिए इस दिन का सबसे अच्छा उपयोग यही है कि हम अपने कम से कम एक अधिकार को ठीक से समझ लें।
निबंध में डालने योग्य तथ्य (जो आपको अलग करेंगे)
- संविधान 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत हुआ, पर लागू 26 जनवरी 1950 को — बीच में 61 दिन का जान-बूझकर रखा गया अंतर।
- यह तिथि 26 जनवरी 1930 की "पूर्ण स्वराज" घोषणा के सम्मान में चुनी गई।
- 2 साल 11 महीने 18 दिन लगे; संविधान हाथ से लिखा गया था, छपा नहीं।
- आरम्भ में 395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ।
- 26 जनवरी को राष्ट्रपति ध्वज फहराते हैं (15 अगस्त को प्रधानमंत्री) — क्योंकि 1947 में राष्ट्रपति का पद ही नहीं था।
- राजपथ का नाम सितम्बर 2022 से कर्तव्य पथ है।
- "समाजवादी" और "पंथनिरपेक्ष" प्रस्तावना में 1976 में जोड़े गए।
निबंध लिखते समय ये गलतियाँ मत कीजिए
- "26 जनवरी 1950 को आज़ादी मिली" — गलत। आज़ादी 15 अगस्त 1947।
- "संविधान 26 जनवरी को बनाया गया" — गलत। उस दिन वह लागू हुआ।
- 2027 के मुख्य अतिथि का नाम मत लिखिए — अभी घोषणा नहीं हुई है। गलत नाम लिखना सबसे भारी गलती मानी जाती है।
- परेड में कितने लोग आए जैसी संख्याएँ मत गढ़िए। परीक्षक को तथ्य चाहिए, सजावट नहीं।
- पूरा निबंध रटकर मत लिखिए। दो-तीन मज़बूत तथ्य लीजिए और बाक़ी अपने शब्दों में लिखिए — यही सबसे अच्छे अंक लाता है।