हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। 2026 में यह सोमवार को पड़ रहा है। इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था, और 1953 से यह दिन नियमित रूप से मनाया जा रहा है।
नीचे तीन अलग-अलग लंबाई के भाषण दिए गए हैं। अपनी कक्षा और समय-सीमा के अनुसार चुनिए — और अंत में दिए गए मंच-टिप्स ज़रूर पढ़िए, क्योंकि प्रतियोगिता सामग्री से नहीं, आत्मविश्वास से जीती जाती है।
10 लाइन — छोटी कक्षाओं (कक्षा 3–6) के लिए
- आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों — आप सभी को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
- आज 14 सितंबर है, और हम हिंदी दिवस मना रहे हैं।
- इसी दिन 1949 में हमारी संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा चुना था।
- हिंदी हमारी मातृभाषा है और संसार में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है।
- हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है — जैसा बोलते हैं, वैसा ही लिखते हैं।
- प्रेमचंद, महादेवी वर्मा और रामधारी सिंह दिनकर जैसे लेखकों ने हिंदी को समृद्ध बनाया।
- हिंदी केवल एक भाषा नहीं, हमारी पहचान है।
- दूसरी भाषाएँ सीखना अच्छा है, परंतु अपनी भाषा भूलना ठीक नहीं।
- आइए, हम हिंदी बोलने में संकोच नहीं, गर्व अनुभव करें।
- इतना कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। धन्यवाद, जय हिंद!
2 मिनट का भाषण (कक्षा 6–10)
आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्रिय साथियों — आज मुझे हिंदी दिवस पर अपने विचार रखने का अवसर मिला है, इसके लिए मैं आभारी हूँ।
14 सितंबर 1949 — यह केवल एक तारीख़ नहीं है। उस दिन हमारी संविधान सभा ने एक बड़ा निर्णय लिया था: देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को संघ की राजभाषा बनाने का। आज उस निर्णय को 77 वर्ष हो चुके हैं। संविधान के अनुच्छेद 343 में यह बात दर्ज है।
हिंदी की सबसे बड़ी विशेषता क्या है? उसकी सरलता। जो लिखा जाता है, वही बोला जाता है। यह भाषा सीखने वाले पर भरोसा करती है, उसे भ्रमित नहीं करती।
परंतु आज एक प्रश्न पूछना आवश्यक है। हम में से कितने लोग हिंदी बोलते समय थोड़ा झिझकते हैं? कितनी बार हमने सोचा कि हिंदी बोलने से कोई हमें कम पढ़ा-लिखा समझेगा? यही सोच असली समस्या है। संसार में कोई भी भाषा किसी दूसरी से छोटी नहीं होती।
मैं यह नहीं कह रहा कि अंग्रेज़ी मत सीखिए। अंग्रेज़ी अवश्य सीखिए — वह आज रोज़गार की भाषा है। परंतु अपनी भाषा की क़ीमत पर नहीं। जो बच्चा अपनी मातृभाषा में सोच सकता है, वह किसी भी भाषा में बेहतर लिख सकता है।
इसलिए आज एक छोटा-सा संकल्प लेते हैं: हिंदी बोलने में गर्व करेंगे, हर महीने कम से कम एक हिंदी पुस्तक पढ़ेंगे, और किसी को हिंदी बोलने पर कभी नीचा नहीं दिखाएँगे।
धन्यवाद। जय हिंद, जय हिंदी!
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5 मिनट का भाषण (कक्षा 11–12, कॉलेज)
आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे साथियों — हिंदी दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
एक प्रश्न से शुरुआत। आप सबसे पूछता हूँ: आज सुबह आपने पहला शब्द किस भाषा में बोला था? अधिकांश का उत्तर होगा — हिंदी, या अपनी मातृभाषा। जो भाषा हमें सपने दिखाती है, वही भाषा हम सबसे पहले बोलते हैं। और आज हम उसी भाषा का दिन मना रहे हैं।
इतिहास। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने लंबी बहस के बाद हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। यह बहस आसान नहीं थी — देश में सैकड़ों भाषाएँ थीं, हर एक की अपनी परंपरा। अंतिम निर्णय यह हुआ कि हिंदी संघ की राजभाषा होगी और अंग्रेज़ी भी साथ चलेगी। संविधान का अनुच्छेद 343 इसी को दर्ज करता है।
एक ज़रूरी स्पष्टीकरण। हिंदी हमारी राजभाषा है, राष्ट्रभाषा नहीं। भारत की कोई एक राष्ट्रभाषा घोषित नहीं है; संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ सम्मिलित हैं। यह अंतर जानना और सही बोलना ही सच्चा भाषा-प्रेम है।
हिंदी की शक्ति। हिंदी बोलने वालों की संख्या संसार की सबसे बड़ी भाषाओं में आती है। परंतु केवल संख्या इसकी शक्ति नहीं है। इसकी शक्ति है इसका साहित्य — प्रेमचंद का 'गोदान', जो आज भी गाँव की सच्चाई दिखाता है; महादेवी वर्मा की कविताएँ; दिनकर की 'रश्मिरथी', जिसकी पंक्तियाँ आज भी रोंगटे खड़े कर देती हैं।
आज की चुनौती। अब ईमानदारी से एक बात। हिंदी को आज सबसे बड़ा ख़तरा बाहर से नहीं, भीतर से है — उस सोच से जो हिंदी बोलने वाले को 'कम पढ़ा-लिखा' मान लेती है। साक्षात्कार में हिंदी में उत्तर देने वाला अभ्यर्थी स्वयं को छोटा अनुभव करता है। यह हमारी सोच की हार है, भाषा की नहीं।
संसार के सबसे विकसित देश देखिए — जापान, जर्मनी, फ़्रांस, चीन। वहाँ पढ़ाई, शोध और न्यायालय, सब अपनी भाषा में होता है। उन्होंने प्रगति अपनी भाषा छोड़कर नहीं, अपनी भाषा में करके की।
समाधान। तीन बातें। पहली — अंग्रेज़ी सीखिए, प्रतियोगिता के लिए, हीन भावना के लिए नहीं। दूसरी — हर महीने एक हिंदी पुस्तक पढ़िए। तीसरी — जब कोई हिंदी बोले, उसकी भाषा पर मत हँसिए। कोई भाषा तब मरती है जब उसके बोलने वाले लज्जित होने लगते हैं।
अंत में। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने लिखा था — "निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।" अपनी भाषा की उन्नति ही हर उन्नति की जड़ है। यह बात डेढ़ सौ वर्ष पुरानी है, और आज भी उतनी ही सच्ची।
तो आज केवल भाषण देकर मत जाइए। एक संकल्प लेकर जाइए — कि हिंदी हमारी कमज़ोरी नहीं, हमारी पहचान है।
धन्यवाद। जय हिंद, जय हिंदी!
मंच पर बोलने के 7 व्यावहारिक सुझाव
- पहली पंक्ति याद रखिए, पूरा भाषण नहीं। शुरुआत आत्मविश्वास से हो गई तो बाक़ी स्वयं चल पड़ता है।
- रुक-रुक कर बोलिए। सबसे बड़ी ग़लती है जल्दी बोलना। हर पूर्ण विराम पर एक सेकंड रुकिए।
- एक प्रश्न से शुरू कीजिए। श्रोता तुरंत ध्यान देते हैं।
- हाथ सहज रखिए। जेब में मत डालिए, और हिल-हिलकर मत बोलिए।
- दृष्टि मिलाइए। तीन स्थान चुनिए — बाएँ, बीच, दाएँ — और बारी-बारी देखिए।
- एक उद्धरण याद रखिए। भारतेंदु वाली पंक्ति छोटी है और प्रभाव छोड़ती है।
- घर पर एक बार ज़ोर से बोलकर अभ्यास कीजिए। मन में पढ़ना और बोलना दो अलग बातें हैं।
यही भाषण अंग्रेज़ी/हिंग्लिश में चाहिए? Hindi Diwas Speech 2026 (English) देखिए। स्वतंत्रता दिवस के लिए Independence Day speech और शिक्षक दिवस के लिए Teachers' Day speech 2026 भी उपलब्ध हैं।