गांधी जयंती हर वर्ष 2 अक्टूबर को मनाई जाती है। 2026 में यह शुक्रवार को पड़ रही है, और यह महात्मा गांधी की 157वीं जयंती है — उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था।
नीचे तीन लंबाई के भाषण दिए गए हैं। एक बात ध्यान रखिए: निर्णायकों को वही भाषण याद रहता है जो गांधी जी को केवल "महान आत्मा" कहकर नहीं छोड़ता, बल्कि उनका कोई एक विचार आज के जीवन से जोड़कर दिखाता है।
10 लाइन — छोटी कक्षाओं (कक्षा 3–6) के लिए
- आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों — सभी को गांधी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।
- आज 2 अक्टूबर है, महात्मा गांधी का जन्मदिन।
- उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
- उनका जन्म 1869 में पोरबंदर, गुजरात में हुआ था।
- हम उन्हें प्यार से बापू कहते हैं।
- उन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलना सिखाया।
- उन्होंने बिना हथियार उठाए देश को स्वतंत्रता दिलाने में सहायता की।
- दांडी यात्रा और स्वदेशी उनके प्रसिद्ध आंदोलन थे।
- आज पूरा विश्व इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है।
- इतना कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। धन्यवाद, जय हिंद!
2 मिनट का भाषण (कक्षा 6–10)
आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्रिय साथियों — आज गांधी जयंती पर अपने विचार रखने का अवसर मिलने के लिए मैं आभारी हूँ।
2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर के एक साधारण घर में एक बालक का जन्म हुआ। वह बालक संकोची था, पढ़ाई में साधारण था, और बचपन में अंधेरे से डरता था। उस बालक का नाम था मोहनदास करमचंद गांधी। आज हम उन्हें महात्मा कहते हैं।
यह बात इसलिए आवश्यक है क्योंकि हम सोचते हैं कि महान लोग अलग जन्म लेते हैं। गांधी जी की कहानी इसके विपरीत कहती है — वे अलग जन्मे नहीं थे, उन्होंने स्वयं को अलग बनाया।
उनकी सबसे बड़ी शक्ति क्या थी? हथियार नहीं। धन नहीं। उनकी शक्ति थीं दो चीज़ें — सत्य और अहिंसा। और इन्हीं दो से उन्होंने उस समय की सबसे बड़ी शक्ति को झुका दिया।
दांडी यात्रा याद कीजिए। 1930 में, 61 वर्ष की आयु में, वे 240 किलोमीटर पैदल चले — केवल एक मुट्ठी नमक उठाने के लिए। नमक कोई हथियार नहीं था। पर वह एक संदेश था: हम आपके अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगे।
आज हम उनसे क्या सीख सकते हैं? सबसे आवश्यक बात यह — अहिंसा कमज़ोरी नहीं है। क्रोध में उत्तर देना सरल है; शांति से अपनी बात पर अड़े रहना कठिन है। कक्षा में, घर में, ऑनलाइन — जहाँ भी विवाद हो, रुककर शांति से बात करना ही गांधी जी का असली संदेश है।
उन्होंने कहा था: "जो परिवर्तन तुम संसार में देखना चाहते हो, पहले स्वयं वही बन जाओ।"
धन्यवाद। जय हिंद!
🔴 Live status
Is exam ki taaza notifications, dates aur direct apply links ExamChowk app par — abhi dekhein →
5 मिनट का भाषण (कक्षा 11–12, कॉलेज)
आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे साथियों — गांधी जयंती की आप सभी को शुभकामनाएँ।
एक प्रश्न से शुरुआत। यदि मैं कहूँ कि एक दुबला-पतला व्यक्ति, जिसके पास न सेना थी न हथियार, संसार के सबसे बड़े साम्राज्य को झुका सकता है — तो शायद आप विश्वास न करें। परंतु ऐसा हुआ था। और वह व्यक्ति 157 वर्ष पूर्व आज ही के दिन जन्मा था।
शुरुआत सरल नहीं थी। हम गांधी जी को सीधे महात्मा के रूप में देखते हैं और भूल जाते हैं कि आरंभ कैसा था। वे इतने संकोची थे कि अपने पहले न्यायालयीन मुक़दमे में खड़े होकर बोल ही नहीं पाए — बिना कुछ कहे बैठ गए। यही व्यक्ति आगे चलकर लाखों लोगों को संबोधित करने वाला था।
मोड़। 1893 में दक्षिण अफ़्रीका के पीटरमैरिट्ज़बर्ग स्टेशन पर, वैध टिकट होते हुए भी उन्हें रेलगाड़ी से उतार दिया गया — केवल उनकी त्वचा के रंग के कारण। उस रात वे ठंडे प्रतीक्षालय में बैठे रहे। और वहीं उन्होंने निश्चय किया कि वे भागेंगे नहीं, लड़ेंगे — परंतु अपने तरीक़े से।
उनका तरीक़ा। गांधी जी का मार्ग दो स्तंभों पर खड़ा था — सत्य और अहिंसा। इन्हें उन्होंने एक नाम दिया — सत्याग्रह, अर्थात् सत्य का आग्रह। इसका अर्थ था: मैं आपसे घृणा नहीं करूँगा, परंतु आपके अन्याय को स्वीकार भी नहीं करूँगा। यह सबसे कठिन मार्ग है। प्रहार करना सरल है, सहना और अडिग रहना कठिन।
दांडी। 1930 में अंग्रेज़ों ने नमक पर कर लगाया — उस वस्तु पर जो समुद्र से निःशुल्क मिलती है और जिसके बिना कोई निर्धन भी नहीं रह सकता। गांधी जी ने 61 वर्ष की आयु में साबरमती से दांडी तक 240 किलोमीटर की पदयात्रा की, 24 दिन चले, और समुद्र तट पर एक मुट्ठी नमक उठाया। उस एक मुट्ठी ने पूरे देश को हिला दिया।
आज की प्रासंगिकता। अब सबसे आवश्यक प्रश्न: 2026 में गांधी जी क्यों मायने रखते हैं?
आज हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ असहमति तुरंत क्रोध में बदल जाती है। फ़ोन पर एक टिप्पणी पढ़ी, और हम उत्तर देने को तत्पर। गांधी जी का संदेश यहीं सबसे अधिक उपयोगी है — अहिंसा का अर्थ चुप रहना नहीं है। इसका अर्थ है अपनी बात पर अडिग रहना, परंतु सामने वाले को शत्रु न मानना।
और उनकी दूसरी सीख — स्वच्छता और श्रम का सम्मान। गांधी जी अपने आश्रम में स्वयं सफ़ाई करते थे। उस काल में, जब यह कार्य केवल कुछ लोगों पर थोपा जाता था, उनका झाड़ू उठाना एक बहुत बड़ा वक्तव्य था।
ईमानदारी से एक बात। गांधी जी स्वयं को संत नहीं मानते थे। उनकी आत्मकथा का नाम ही है "सत्य के साथ मेरे प्रयोग" — प्रयोग, अर्थात् भूलें भी। वे अपनी भूलों के विषय में स्वयं लिखते थे। संभवतः यही उनकी सबसे बड़ी सीख है: महान बनने के लिए दोषरहित होना आवश्यक नहीं, ईमानदार होना आवश्यक है।
अंत में। आज हम सब प्रतिमा पर पुष्प चढ़ाकर घर चले जाएँगे। परंतु यदि सचमुच उन्हें श्रद्धांजलि देनी है, तो आज एक छोटा कार्य कीजिए — किसी ऐसे व्यक्ति से शांति से बात कीजिए जिससे आप सहमत नहीं हैं। यह भी उसी एक मुट्ठी नमक जैसा है: छोटा दिखता है, परंतु है नहीं।
धन्यवाद। जय हिंद!
भाषण में प्रयोग योग्य 5 उद्धरण
- "जो परिवर्तन तुम संसार में देखना चाहते हो, पहले स्वयं वही बन जाओ।"
- "आँख के बदले आँख — इससे तो सारा संसार अंधा हो जाएगा।"
- "शक्ति शारीरिक क्षमता से नहीं आती; वह अदम्य इच्छाशक्ति से आती है।"
- "ऐसे जियो जैसे कल मरना हो; ऐसे सीखो जैसे सदैव जीना हो।"
- "विनम्रता से भी आप संसार को हिला सकते हैं।"
मंच पर बोलने के सुझाव
- एक कहानी से आरंभ कीजिए — पीटरमैरिट्ज़बर्ग स्टेशन वाली घटना सबसे प्रभावी है।
- केवल तिथियाँ मत गिनाइए। निर्णायकों को विचार याद रहता है, वर्ष नहीं।
- रुक-रुक कर बोलिए और हर पूर्ण विराम पर एक सेकंड रुकिए।
- एक उद्धरण अंत के लिए बचाइए — प्रभाव वहीं बनता है।
- आज से जोड़िए। जो भाषण आज के जीवन से जुड़ता है, वही जीतता है।
यही भाषण अंग्रेज़ी/हिंग्लिश में चाहिए? Gandhi Jayanti Speech 2026 (English) देखिए। अन्य भाषण: हिंदी दिवस पर भाषण, Independence Day speech, Teachers' Day speech।